Saturday, August 30, 2014

हम दुखी हैं...

उन्हें हिंदू लड़कियों की बहुत चिंता है। हिंदू लड़कियां बहुत भोली-भाली, मासूम हैं। उनकी मासूमियत का फायदा मुसलिम लड़के उठाते हैं। अच्छे-अच्छे कपड़े पहनकर, बाइक पर सवार होकर, उन्हें अपने प्यार के जाल में फंसाते हैं। फिर उनसे शादी करने की शर्त रखते हैं। शर्त यह कि वे अपना धर्म बदलें। वरना, कलपती रहें। इन लड़कों के लिए मोहब्बत एक जेहाद है।
हमारी लड़कियां बर्बाद हो रही हैं। हम उन्हें बर्बाद होता नहीं देख सकते। यह बात और है कि लड़कियां हर जगह बर्बाद हो रही हैं। उन्हें जन्म लेने का अधिकार ही नहीं तो प्रेम और शादी करने का अधिकार कैसे हो सकता है? साल 2011 के जनगणना संबंधी आंकड़े बताते हैं कि लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसकी एक ही वजह है, जन्म लेने से पहले गर्भ में ही बच्ची को मार डालना। नतीजा यह है कि देश में छह साल तक की उम्र के बच्चों के लिंगानुपात (सेक्स रेशो) में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या सिर्फ 914 है। जिन्हें हिंदु लड़कियों की चिंता है, उन्हें इस बात पर भी चिंता होनी चाहिए। उन्हें इस बात पर भी दुखी होना चाहिए कि हिंदु समुदाय में लिंगानुपात ईसाइयों और मुसलमानों से कम है। यह खुलासा भी जनगणना के आंकड़े करते हैं। हिंदुओं में एक हजार पुरुषों पर 925 महिलाएं हैं। ईसाइयों में लिंगानुपात सबसे अधिक है। दूसरे नंबर पर मुस्लिम समाज है।
क्या लड़कियों की मासूमियत पर दुखी होने वाले दहेज प्रताड़ना और बलात्कार के मामलों पर दुखी नहीं होते? नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो का कहना है कि देश में हर घंटे एक महिला की मौत दहेज की वजह से होती है और हर रोज बलात्कार के 92 मामले दर्ज होते हैं। दहेज की कुप्रथा और बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य हर समुदाय में मौजूद है। यह किसी धर्म और जाति तक सीमित नहीं। पर महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर किसी नए कानून की पेशकश करके चुप्पी साध ली जाती है। इसे किसी सामाजिक आंदोलन का हिस्सा नहीं बनाया जाता। हां, धार्मिक आंदोलन के लिए हवा बनाई जाती है।


जैसा कि तृणमूल कांग्रेस के एमएलए दीपक हलदर ने कहा है, जब तक धरती रहेगी, बलात्कार होते रहेंगे। तो, माननीय विधायक महोदय की बात पर गौर करते हुए हम कह सकते हैं कि बलात्कार से पीड़ित होने वाली महिला की बर्बादी पर काहे की हाय-तौबा। उसे तो समाज ने स्वीकार कर लिया है????

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